पश्चिम बंगाल, क्राइम इंडिया संवाददाता। बाल अधिकार सप्ताह के अवसर पर बंगाल के विभिन्न स्कूलों से 300 बच्चों ने अपने राज्य की मुख्यमंत्री को संबोधित एक खुले पत्र के माध्यम से अपने ‘सांस लेने के अधिकार” (राइट टू ब्रीद) की अपील की है। बंगाल के विभिन्न आयु समूहों के स्कूली छात्रों ने स्विचआन फाउंडेशन के साथ बाल अधिकार पर काम कर रहे गैर सरकारी संगठनों द्वारा आयोजित एक खुले पत्र अभियान में भाग लिया। यह अभियान उस सर्वनाश के भविष्य पर ध्यान दिलाने के प्रयास का एक हिस्सा है, जहां बढ़ते वायु प्रदूषण के कारण हमारे बच्चों को सांस लेने के लिए ताजी हवा नहीं मिलती है। पूर्वी भारत और इंडो-गैंगेटिक प्लेन में बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच तत्काल हस्तक्षेप का अनुरोध करने के लिए स्कूली छात्रों के साथ स्विचआन फाउंडेशन, बंगाल की मुख्यमंत्री के साथ मिलने की मांग करेगा। पत्र लिखने वाले एक छात्र ने कहा, मैंने अपने दोस्तों को सांस की बीमारी से पीड़ित देखा है, मुझे लगातार खांसी और जुकाम रहता है और बाहर खेलने का आनंद नहीं ले सकते है। मैं अपने नेताओं से अनुरोध करता हूं कि प्रदूषण फैलाने वाली कारों और कारखानों को कम करें। पत्र लिखने वाले कई बच्चों को सांस लेने में कठिनाई हो रही थी और वे वायु प्रदूषण के कारण तीव्र श्वसन विकारों से पीड़ित थे। बच्चों ने यह भी शिकायत की कि उनके इलाके के लोग प्लास्टिक के पैकेट और अन्य प्रकार के कचरे का उपयोग करने और जलाने में लापरवाही बरतते हैं। बच्चों ने अपने पत्रों के माध्यम से शहरों में वाहनों की बढ़ती संख्या पर भी चिंता जताई। वर्षों से विशेषज्ञ कहते रहे हैं कि बच्चे प्रदूषण के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं क्योंकि उनके फेफड़े अविकसित होते हैं और उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होती है। फिर भी, दुनिया भर में दस में से नौ बच्चे ऐसे विषाक्त पदार्थों में सांस ले रहे हैं जो सुरक्षा स्तर को पार कर गया हैं। वर्षों से, स्थिति गंभीर हो गई है, यहां तक कि यूनिसेफ जैसे वैश्विक संस्थानों ने भी कहा है कि वायु प्रदूषण 2050 तक बाल मृत्यु दर का प्रमुख कारण बन जाएगा। हालांकि, सभी बच्चों को स्वच्छ हवा में सांस लेने का अधिकार होना चाहिए।कैरिटस इंडिया, उद्दामी इंडिया फाउंडेशन और बाल कल्याण संघ जैसे संगठन स्वच्छ हवा में सांस लेने के लिए बच्चों के अधिकारों पर इस अभियान का हिस्सा थे। डा. कौस्तव चौधरी (बाल रोग सलाहकार, अपोलो ग्लेनीगल्स अस्पताल) जैसे विशेषज्ञों ने बच्चों के स्वच्छ हवा के अधिकार की पहल का समर्थन करते हुए राज्य में बच्चों के न्यूरोलाजिकल और संज्ञानात्मक विकास का हवाला दिया और स्वच्छ हवा में सांस लेने के बच्चों के अधिकार की मांग भी उठाई। बाल अधिकार और वायु प्रदूषण के मुद्दे पर काम करने वाले विभिन्न संगठनों के प्रचारक और विषय विशेषज्ञ भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए। विनय जाजू, एमडी, स्विचआन फाउंडेशन ने कहा कि बच्चों की एक पूरी पीढ़ी आज संकट में है। यह हमारी भावी पीढ़ी के लिए एक साथ आने और स्वस्थ स्वच्छ हवा के उनके अधिकार को सुरक्षित करने का समय है। प्रत्येक सूक्ष्म क्रिया सामूहिक रूप से एक व्यापक प्रभाव पैदा कर सकती है।
Edited By : Rahman