तृणमूल नेता : ने एक करोड़ लाटरी जीतनेवाले को सात लाख में टिकट बेचने को किया था मजबूर

पश्चिम बंगाल, क्राइम इंडिया संवाददाता, सुब्रत मोहंता बंगाल में करोड़ों रुपये के मवेशी तस्करी घोटाले में लाटरी एंगल की जांच कर रहे सीबीआइ के अधिकारियों ने गुरुवार को एक लाटरी पुरस्कार विजेता से पूछताछ की। सीबीआइ सूत्रों के अनुसार पूछताछ में उसने खुलासा किया कि उसे अपने एक करोड़ रुपये के लाटरी टिकट को औने-पौने दाम पर बेचने के लिए मजबूर किया गया था। बीरभूम जिले के बोलपुर पुलिस स्टेशन के अंतर्गत बोरो शिमुलिया गांव के निवासी नूर अली ने सीबीआइ के एक अस्थायी शिविर में आकर अधिकारियों को सूचित किया कि इस साल जनवरी में उसने अपने द्वारा खरीदे गए लाटरी टिकट के खिलाफ एक करोड़ रुपये का पुरस्कार जीता था। नूर अली ने बताया कि हालांकि, उनके पुरस्कार जीतने की खबर वायरल होने के तुरंत बाद, कुछ अज्ञात व्यक्ति उनके आवास पर आए और पुरस्कार विजेता एक करोड़ की लाटरी टिकट को महज सात लाख रुपये की राशि देकर ले गए। जब सीबीआइ शिविर में नूर अली से पूछताछ की जा रही थी, उनके पिता कोटई शेख ने शिविर के बाहर मीडियाकर्मियों से कहा कि शुरू में वह और उनका बेटा टिकट नहीं देना चाहते थे। शेख ने कहा, लेकिन एक शाम, वोजा नामक एक स्थानीय तृणमूल कांग्रेस के नेता और उनके कुछ सहयोगी मेरे घर आए और टिकट नहीं देने पर हमें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी। हम धमकियों से बचने के लिए सात दिनों तक अपने घर से दूर रहे। लेकिन जब हम सात दिनों के बाद लौटे, तो धमकियां जारी रहीं और आखिरकार, हमें औने-पौने दामों पर टिकट सौंपने के लिए मजबूर होना पड़ा। संयोग से तृणमूल कांग्रेस के बाहुबली नेता और पार्टी के बीरभूम जिला प्रमुख अनुब्रत मंडल, जो वर्तमान में मवेशी तस्करी घोटाले में कथित संलिप्तता के लिए न्यायिक हिरासत में हैं, उन्होंने कथित तौर पर उस समय एक करोड़ रुपये का लाटरी पुरस्कार जीता था जब नूर अली ने इसे जीता था। अब सीबीआइ इस बात की जांच कर रही है कि क्या यह वही टिकट है जिसे नूर अली ने खरीदा था। दरअसल, पहले से ही सीबीआइ ने कुल पांच संदिग्ध लाटरी टिकटों को ट्रैक किया है, जिनका पुरस्कार अनुब्रत मंडल या उनकी बेटी सुकन्या मंडल के पक्ष में तीन साल से भी कम समय में चला गया। केंद्रीय एजेंसी के अधिकारियों ने छठी लाटरी का भी पता लगाया है, जिसकी पुरस्कार राशि घोटाले के मुख्य आरोपितों में से एक इनामुल हक के नाम चली गई थी। केंद्रीय एजेंसी के अधिकारियों को अब लगभग यकीन हो गया है कि एक विशिष्ट अवधि के भीतर इतने सारे लाटरी पुरस्कार महज संयोग की बात नहीं हो सकते हैं और इन लाटरी पुरस्कारों का मवेशी तस्करी से आय के डायवर्जन के साथ कुछ संबंध है।

Edited By : Rahman

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