WB SSC Scam: पार्थ-अर्पिता के खिलाफ सुबूत के तौर पर ईडी ने अदालत में जमा किए दो बड़े संदूको में भरकर 14,643 दस्तावेज

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। शिक्षक भर्ती घोटाले में गिरफ्तार बंगाल के पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी और उनकी करीबी अर्पिता मुखर्जी के खिलाफ सुबूत के तौर पर ईडी ने अदालत में 14,643 दस्तावेज जमा किए हैं। आर्थिक भ्रष्टाचार से जुड़े किसी मामले में संभवत: पहली बार इतनी बड़ी तादाद में दस्तावेज जमा किए गए हैं। ऐसे दस्तावेजों को कानूनी भाषा में ‘रिलाई अपन डाक्यूमेंट्सÓ (आरयूडी) कहा जाता है। ये दस्तावेज पार्थ-अर्पिता व उनकी छह कंपनियों के खिलाफ हैं। ईडी ने अपनी पहली सप्लीमेंट्री चार्जशीट के साथ इन दस्तावेजों को संलग्न किया है। दो बड़े संदूको में भरकर इन दस्तावेजों को अदालत लाया गया था। ईडी इस मामले में अभी कम से कम दो और सप्लीमेंट्री चार्जशीट जमा कर सकती है और उसके बाद अंतिम चार्जशीट जमा करेगी। ऐसे में आरयूडी का पहाड़ खड़ा हो सकता है। ईडी ने जमा की गई चार्जशीट में पार्थ और अर्पिता के पास से बरामद नकदी, गहनों समेत 103.1 करोड़ रुपये की स्थायी व अस्थायी संपत्ति का ब्योरा पेश किया है। चार्जशीट में कहा गया है कि पार्थ की कंपनियों के जरिए गैरकानूनी तरीके से आर्थिक लेन-देन होता था और उस काली कमाई को विभिन्न कंपनियों के माध्यम से सफेद करके उनका विभिन्न संपत्ति में निवेश किया जाता था। अदालत में जो आरयूडी जमा किए गए हैं, वे इन सारी चीजों को उजागर कर रहे हैं। कानून के जानकारों का कहना है कि ये दस्तावेज पार्थ व अर्पिता की परेशानी बढ़ा सकते हैं और इनकी वजह से उन्हें लंबे समय तक केंद्रीय जांच एजेंसियों अथवा न्यायिक हिरासत में रहना पड़ सकता है। इतनी बड़ी संख्या में आरयूडी अदालत में जमा देने से समझा जा सकता है कि ईडी ने पार्थ व अर्पिता को गिरफ्तार करने से पहले उनके खिलाफ काफी सुबूत जुटाए गए थे। दोनों की गिरफ्तारी के 58 दिनों के अंदर उनके खिलाफ इतनी बड़ी तादाद में दस्तावेज जमा देने का मतलब है कि ईडी ने बहुत पहले से ही इन दस्तावेजों को संग्रह करने का काम शुरू कर दिया था और उसी के आधार पर दोनों को गिरफ्तार किया गया है। पूर्व सरकारी अधिवक्ता राधाकांत मुखोपाध्याय ने कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल में किसी मामले में ज्यादा से ज्यादा 700 से 800 आरयूडी देखे हैं। इतनी बड़ी तादाद में पहली बार दस्तावेज जमा होते देख रहे हैं। अदालत ने अगर उनमें से आधे दस्तावेजों को भी सुबूत के तौर पर ग्रहण कर लिया तो आरोपितों के लिए बहुत मुश्किल हो सकती है। दूसरी तरफ पार्थ चटर्जी के अधिवक्ता सलीम रहमान ने कहा कि जांच एजेंसी ने उनके मुवक्किल और अर्पिता को आरोपित बनाकर चार्जशीट पेश की है। दोनों को दोषी साबित करने की जिम्मेदारी भी उनकी है। कानूनी लड़ाई होगी और उसी समय इन दस्तावेजों की विश्वसनीयता स्पष्ट होगी।

Edit By : M T RAHMAN

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