डीए पर जारी कानूनी लड़ाई के बीच बंगाल सरकार का दावा, तृणमूल सरकार ने वाममोर्चा से कई गुणा अधिक राशि की खर्च

पश्चिम बंगाल, क्राइम इंडिया संवाददाता, सुब्रत मोहंता बंगाल में राज्य सरकार के कर्मचारियों के बकाया महंगाई भत्ते (डीए) को लेकर जारी कानूनी लड़ाई एवं आंदोलन के बीच राज्य के वरिष्ठ मंत्री मानस भुइयां ने शुक्रवार को दावा किया कि पूर्ववर्ती वाममोर्चा सरकार की तुलना में तृणमूल सरकार ने डीए पर कई गुणा अधिक राशि खर्च की है। विधानसभा परिसर में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि 2008 से 2011 तक वाममोर्चा शासन में सरकारी कर्मियों को मात्र 35 प्रतिशत डीए दिया गया था और इसपर महज 8400 करोड़ रुपये की राशि खर्च की गई थी। लेकिन हमारी सरकार आने पर 2011 से 2019 तक हमलोगों ने 90 प्रतिशत डीए दिए हैं, जिसपर 27,000 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। यही नहीं, 2019 में ममता बनर्जी की अगुवाई वाली हमारी सरकार ने छठे वेतन आयोग की सिफारिशों को भी लागू किया। इसके बाद बेसिक मिलाकर 125 प्रतिशत डीए का भुगतान किया गया। उन्होंने आगे कहा कि अभी राज्य सरकार की आर्थिक स्थिति खराब है, क्योंकि केंद्र के पास राज्य का 1.18 लाख करोड़ रुपये का बकाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य के साथ भेदभाव कर संघीय ढांचे का गला दबाया जा रहा है। भुइंया ने कहा कि 100 दिन के रोजगार योजना का पैसा भी केंद्र की ओर से नहीं दिया जा रहा है जबकि पांच- छह वर्ष तक इस योजना में बंगाल में नंबर एक रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने मनरेगा में 28 लाख श्रम दिवस सृजित किए। वैकल्पिक तरीके से 30 लाख जाब कार्ड धारकों को काम दिया है। उन्होंने आगे कहा कि वाममोर्चा शासन में राजस्व उगाही मात्र 22,000 हजार करोड़ था जो अभी 76,000 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। उन्होंने इसे अपनी सरकार की बड़ी उपलब्धि बताया और इसका श्रेय मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के दूरदर्शी नेतृत्व को दिया। उन्होंने राज्य पर भारी कर्ज के सवाल पर कहा कि वाममोर्चा सरकार ने 2.03 लाख करोड़ के ऋण का बोझ देकर गया था। इस मौके पर वित्त मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने कहा कि डीए का मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में है। उन्होंने कह कि राज्य सरकार अपने कर्मचारियों के हितों को लेकर संवेदनशील है। चंद्रिमा ने आरोप लगाया कि विपक्ष सिर्फ इस मुद्दे पर राजनीति कर रहा है और सरकारी कर्मियों को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है। दूसरी ओर, शुक्रवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल (कैबिनेट) की बैठक में ट्रांसजेंडरों को अधिकार देने वाले केंद्र के कानून के अनुरूप नियमन को मंजूरी दी गई। वित्त मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने इसकी जानकारी दी। 2019 में केंद्र सरकार ने संसद से ट्रांसजेंडरों को अधिकार व सुरक्षा देने वाले टांसजेंडर पर्संस (प्रोटेक्शन आफ राइट्स) अधिनियम पारित किया था।

Edited By : Rahman

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