लखनऊ, जेएनएन। UP Dalit Sisters Murder Case: लखीमपुर खीरी के निघासन में दो सगी बहनों के साथ बुधवार को हुए सामूहिक दुष्कर्म मामले में गुरुवार देर शाम दोनों का अंतिम संस्कार कर दिया गया। जिलाधिकारी ने परिजन को उनकी तीन मांगें पूरी करने का आश्वासन दिया है। गुरुवार सुबह मामला मीडिया में आने के बाद इस पर दिनभर राजनीति चलती रही। पुलिस ने इस मामले के सभी छह आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक दोनों बहनों संग पहले सामूहिक दुष्कर्म किया गया, इसके बाद उनकी रस्सी से गला दबाकर हत्या की गई। फिर शवों को पेड़ से लटका दिया गया। बुधवार शाम 5 बजे : ऐसे शुरू हुआ पूरा घटनाक्रम घर वालों का आरोप लगाया कि जुनैद, सुहैल और हफीजुल रहमान के साथ पीड़ित लड़कियों के घर पहुंचा। आरोपी लड़कियों को बहला फुसला कर ले गया। वहीं पुलिस के अनुसार बुधवार शाम चार बजे से पांच बजे के करीब किशोरियों को कोई अगवा करके लेकर नहीं गया था, बल्कि वह दोनों स्वयं किसी छोटू नामक आरोपित के साथ गई थीं, जिसके बाद उनके साथ अनहोनी हो गई। तकरीबन 5 बजे घर से लगभग एक किमी दूर एक खेत में लड़कियों के शव पेड़ से लटके मिले। उसके बाद भीड़ लगनी शुरू हो गई। इधर, आरोपी गांव से निकल चुके थे। बुधवार शाम 7 बजे से 9 बजे तक चला हंगामा घटना की जानकारी मिलते ही कोतवाल समेत पुलिसकर्मी और तमाम मीडिया मौके पर पहुंच गए। शाम सात बजे ग्रामीणों और पुलिस के बीच कहासुनी शुरू हो गई। पुलिस ने एंबुलेंस से शवों को लखीमपुर भेजा गया। इसके कुछ देर बाद ग्रामीण निघासन पहुंचे और कस्बे के सदर चौराहे को जाम कर दिया। एसपी संजीव सुमन चौराहे पर पहुंचे और ग्रामीणों को समझाने की कोशिश की, लेकिन मामले का हल नहीं निकल पाया। रात 9 बजे तक जाम लगा रहा और लोग हंगामा करते रहे। बुधवार रात 10.30 बजे : पुलिस ने आरोपी छोटू को पकड़ा ग्रामीणों के हंदामें के बीच लड़कियों की मां ने पहली बार गांव के छोटू पर बेटियों का मरवाने का आरोप अफसरों के सामने जड़ा। इसके फिर से पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करते ग्रामीण फिर चौराहे पहुंचे और मां को सड़क पर लिटाकर एक बार फिर से जाम लगा दिया। इस बीच रात 10.30 बजे पुलिस ने छोटू को घर से पकड़ लिया। छोटू घर पर आराम से लेटा हुआ था। पुलिस ने छोटू से पूछताछ शुरू की। छोटी ने सारी बात उगल दी। छोटू ने ही आरापी जुनैद और सुहैल के नंबर पुलिस को उपलब्ध कराए। रात करी 10 बजे आईजी लक्ष्मी सिंह निघासन चौराहे पर पहुंचीं और ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया और इसके बाद घटनास्थल के लिए रवाना हो गईं। इस बीच सभी आरोपी अपने अपने घर पहुंच चुके थे। पुलिस के अनुसार, ये सभी आरोपी रात साढ़े ग्यारह बजे के करीब में फरार होने की योजना बनाकर घर गए थे। सभी को रात को 12 बजे गांव के बाहर मिलना था। रात 12.30 बजे : सुहैल, हफीजुलर्रहमान और करीमुद्दीन दबोचे गए पांचों आरोपी रात में गांव के बाहर मिलने की योजना बनाकर निकले थे। सुहैल अपनी बाइक से सबसे पहले गांव के बाहर पहुंचा, फिर हफीजुलर्रहमान और करीमुद्दीन आ गए। ये लोग गांव छोड़ने के लिए अपने दोनों साथियों का इंतजार कर रहे थे। इसी बीच करीब 12.30 बजे पुलिस ने इन्हें गिरफ्तार कर लिया। इनकी निशानदेही पर पुलिस ने रात को ही आरिफ को भी पकड़ लिया। इधर, आईजी के समझाने के बाद ग्रामीण परिजनों के साथ कोतवाली पहुंचे। मां की तरफ से एसपी संजीव सुमन को तहरीर दी गई। छोटू समेत चार आरोपी गिरफ्तार होने के बाद पुलिस मुख्य आरोपी जुनैद की तलाश में जुट गई। उसका मोबाइल भी सर्विंलांस पर था, सुबह करीब 4 बजे के आस पास उसकी लेकेशन गांव के ही खेतों में मिली। पुलिस ने घेराबंदी कर ली। पुलिस के सामने आते ही जुनैद ने गोली चलाने की धमकी दी। पुलिस ने भी गोली चलाई जो उसके पैर में लगी। वह गिर पड़ा। इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। एसपी संजीव सुमन ने प्रेस कांफ्रेंस करके घटना का खुलासा किया। छह आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी दी। एसपी संजीव सुमन ने बताया कि बुधवार को निघासन में दो सगी बहनों के शव पेड़ से लटके मिले थे। जिन छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है उनमें जुनैद, सुहैल, हफीजुर्रहमान, छोटे उर्फ आरिफ, करीमुद्दीन, व छोटू गौतम हैं। आरोपितों में छोट़ू उसी गांव का है, जबकि अन्य पांच लालपुर गांव के रहने वाले हैं। एक आरोपित जुनैद झंडी चौकी क्षेत्र में मुठभेड़ के बाद जख्मी भी हुआ है। उसके पैर में गोली लगी है। उससे 315 बोर का तमंचा, दो कारतूस व एक खोखा कारतूस बरामद हुआ। गुरुवार सुबह 10 बजे दोनों बहने के शवों को डॉक्टरों के पैनल ने पोस्टमार्टम किया। शव पोस्टमार्टम के बाद गांव पहुंचे। परिवार के सिपुर्द किए गए। वारदात की खबर सामने आने के बाद विपक्षी दल सक्रिय हो गए और पोस्टमार्टम हाउस से लेकर गांव तक उनकी हलचल पूरे दिन रही। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक, पहले लड़कियों को गला दबाकर मारा गया, फिर शव को पेड़ पर लटका दिया गया। पोस्टमार्टम के बाद घरवालों ने दोनों किशोरियों के अंतिम संस्कार करने से तब तक इन्कार कर दिया जब तक उनकी मांगें पूरी न हो जाएं। उनकी मांग थी कि परिवार को एक करोड़ रुपये की आर्थिक मदद, एक आवास और एक सरकारी नौकरी दी जाए, जिस पर घंटों तक प्रशासन परिवार को समझाता रहा। आखिरकार देर शाम प्रशासन को सफलता मिली। डीएम महेंद्र बहादुर सिंह ने बताया कि परिवार को आश्वस्त किया गया है कि उनकी वाजिब मांगें मानी जाएंगी। शासन को अवगत करा दिया गया है और परिवार ने स्वेच्छा से अंतिम संस्कार कर दिया है।
Edit By : M T RAHMAN











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