सीरियल किलर का हत्या: जिस लोग कहते हैं नागपुर का गब्बर सिंह
क्राइम इंडिया संवाददाता, जुर्म की दुनिया में सीरियल किलिंग और रेप की बहुत सी संगीन और सनसनीखेज घटनाएं दर्ज हैं जिन्हें याद करके लोग आज भी सहम जाते हैं. ये सीरियल किलर ऐसे अपराधी होते हैं, जिन्हें खून करने का चस्का लग जाता है. यही वजह है कि वे बार-बार खौफनाक घटनाओं को अंजाम देकर कानून के लिए चुनौती बन जाते हैं और अपनी करतूतों से बाज नहीं आते. क्राइम कथा में आज बात ऐसे ही एक खौफनाक सीरियल किलर. जिस पर एक बाद एक करीब 200 महिलाओं को अपना शिकार बनान का इल्जाम है. जितना वो सीरियल किलर कुख्यात था, उससे ज्यादा चर्चाओं में आ गई थी उसकी मौत. भरत कालीचरण को ही अक्कू यादव के नाम से जाना जाता था. उसका जन्म 1971 के आस-पास ही महाराष्ट्र के नागपुर के एक बाहरी इलाके में हुआ था. उस इलाके को कस्तूरबा नगर झुग्गी के नाम से लोग जानते थे. भरत कालीचरण उर्फ अक्कू यादव के दो भाई और थे. एक नाम था संतोष और दूसरे का युवराज. उसका परिवार वहीं रहकर छोटा-मोटा धंधा करता था. ऐसा धंधा जिसका ताल्लुक जुर्म की दुनिया से था. उस झुग्गी बस्ती में दो गिरोह सक्रीय थे, जिसमें से एक गैंग के साथ अक्कू यादव काम करता था. ये दोनों गैंग ही कस्तूरबा नगर झुग्गी बस्ती पर राज करने के लिए आपस में लड़ते थे. 90 के दशक में अक्कू यादव पूरे कस्तूरबा नगर स्लम इलाके में आतंक का दूसरा नाम बन गया था. पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक पहली बार उसका नाम साल 1991 में सामने आया था. तब उसके खिलाफ गैंगरेप में शामिल होने के इल्जाम लगे थे. इसी मामले ने उसे कुख्यात बना दिया. इसके बाद उसने पलटकर पीछे नहीं देखा और जरायम की दुनिया में आगे बढ़ता ही चला गया. अक्कू यादव की मौत से पहले तक उसके खिलाफ दो दर्जन से ज्यादा मामले दर्ज हुए और वो 14 बार गिरफ्तार किया गया. उसके खिलाफ रेप, हत्या, डकैती, जबरन वसूली, घर पर हमला, हमले की धमकी जैसे संगीन मामले दर्ज किए गए थे. 1999 के आखिर में अक्कू यादव को महाराष्ट्र निवारक निरोध कानून के तहत एक साल के लिए हिरासत में लिया गया था. इसी तरह से उसे द महाराष्ट्र प्रिवेंशन ऑफ डेंजरस एक्टिविटीज ऑफ स्लमलॉर्ड्स, बूट-लेगर, ड्रग ऑफेंडर्स एंड डेंजरस पर्सन्स एक्ट 1981 के तहत भी नामजद किया गया था.गैंगरेप के मामले में नामजद होने के बाद अक्कू यादव कुख्यात हो गया था. इसके बाद उसका गैंग स्लम इलाके में चलने वाले धंधों की एवज में रंगदारी वसूल करने लगा था. यही नहीं वो अवैध कब्जे और हमलों में भी शामिल होने लगा था. जब कोई उसका विरोध करता था या उसके खिलाफ पुलिस के पास जाने की कोशिश करता था तो वह उसे शख्स को धमकी देने या उसके घर में घुसकर हमला करने से भी गुरेज नहीं करता था. ऐसा करने वालो को उसने अपना निशाना बनाया. वो लोगों का अपहरण करता था और उन्हें बंधक बनाकर प्रताड़ित करता था. भरत कालीचरण उर्फ अक्कू यादव इतना शातिर था कि उसने पुलिसवालों के साथ मिलकर भी अपराध किए. वो पुलिसवालों को खूब खिलाता-पिलाता था. उन पर पैसा खर्च करता था. उन्हें रिश्वत के तौर पर मोटी रकम दिया करता था. इसी वजह से वो बेखौफ होकर अपने इलाके में जुर्म किया करता था. कई मामले तो ऐसे भी थे, जिनमें पुलिसवाले उसके खिलाफ कार्रवाई करने की बजाय उसका साथ दिया करते थे. उसके गैंग के गुर्गे लोगों में खौफ पैदा करने के लिए उसकी सच्ची झूठी कहानियां इलाके में फैलाया करते थे. उसकी करतूतों का बखान करते थे ताकि कोई भी उसके खिलाफ खड़ा होने का साहस न जुटा पाए. अक्कू यादव जब जुर्म की दुनिया में नाम कमा रहा था तभी उसके सिर पर हवस का ऐसा जुनून सवार हुआ कि वो अपराधी से एक वहशी दरिंदा बन बैठा. औरत उसकी कमजोरी बन गई. इसी कमजोरी ने उसे सीरियल रेपिस्ट के साथ-साथ सीरियल किलर बना डाला. उसका शिकार बनने वाली महिलाओं में 10 साल की बच्ची से लेकर एक बुजुर्ग महिला तक शामिल थी. उसके बारे में हैवानियत की बहुत कहानियां प्रचलित हैं जो लोगों को दहशत से भर देती हैं. दरअसल, जब वो भी इलाके में निकलता था तो महिलाएं घरों में छिप जाती थीं और अपनी बच्चियों को भी छिपा लेती थीं. उसकी आदत थी कि अगर उसे कोई महिला या लड़की पसंद आ जाए तो वो उसे हर हाल में अपना शिकार बनाने की कवायद में जुट जाता था.. प्यार से या जबरदस्ती. एक बार अगर कोई महिला उसके चंगुल में फंस जाती थी तो पहले वो बेरहमी से उसकी इज्जत लूटता था और फिर हवस मिट जाने के बाद उसका कत्ल करता था. वो अपने शिकार को तड़पा-तड़पाकर मारता था. उसे न जाने क्या हो जाता था कि वो तेजधार चाकू या उसके जैसे किसी हथियार से अपने शिकार के जिस्म को गोदकर छलनी कर देता था. वो तब तक अपने शिकार पर वार करता था, जब तक उसका जिस्म ठंडा न पड़ जाए. जहां वो वारदात को अंजाम दिया करता था, वहां हर तरफ बिखरा खून और मुर्दा जिस्म उसकी दरिंदगी की गवाही देते थे. अक्कू यादव ने इतनी महिलाओं के साथ रेप किया था कि कस्तूरबा नगर झुग्गी बस्ती के हर दूसरे घर में एक रेप पीड़िता थी. लोग उसे कस्तूरबा नगर का गब्बर सिंह भी कहते थे. कभी वो किसी की मोटरसाइकिल छीन लेता था तो कभी किसी का मोबाइल फोन. अक्कू यादव ने वहां रहने वाली अंजना बाई बोरकर की बेटी आशा बाई का उसकी 16 वर्षीय पोती के सामने रेप के बाद कत्ल कर दिया था. अक्कू ने उसकी बालियों के लिए उसके कान और अंगूठियों के लिए उसकी अंगुलियों को काट दिया था. वो लोगों का कत्ल करता था और लाश को रेल की पटरियों पर फेंक देता था. एक पीड़िता ने पुलिस को बताया था कि एक दिन सुबह करीब 4 बजे भरत कालीचरण उर्फ अक्कू यादव उनके घर में घुस आया था. पहले उसने उनके दरवाजे पर दस्तक दी. जब अंदर से पूछा गया कि कौन है? तो उसने जवाब दिया कि वो एक पुलिसवाला है. जैसे ही महिला के पति ने दरवाजा खोला. अक्कू ने उस पर धावा बोल दिया. यादव ने अंदर घुसते ही महिला के पति पर चाकू से वार किया. उसकी चाकू उसके पति की जांघ में लगी और खून की धारा बह निकली. फिर अक्कू ने उसे बाथरूम में बंद कर दिया और उसकी पत्नी को बालों से खींचकर अपने साथ एक सुनसान जगह ले गया जहां उसने महिला को बंधक बनाकर उसके साथ बलात्कार किया. इसके कुछ घंटों बाद उसने महिला को रिहा किया. अक्कू यादव ने एक बार शादी के तुरंत बाद एक महिला को अगवा कर लिया था और उसके साथ बलात्कार किया था. उस वहशी दरिंदे ने आशो भगत नाम की एक महिला के स्तन काटकर उसे उसकी बेटी और पड़ोसियों के सामने तड़पाया था और फिर सरेआम उसके जिस्म के टुकड़े-टुकड़े कर उसे दर्दनाक मौत दी थी. अक्कू यादव और उसके गैंग ने कलमा नाम की एक महिला को उसकी डिलीवरी के महज दस दिन बाद गैंगरेप का शिकार बनाया था. इसके बाद कलमा ने खुद पर केरोसिन डालकर आग लगा ली थी. भरत कालीचरण उर्फ अक्कू यादव के एक पड़ोसी अविनाश तिवारी ने गैंगस्टर अक्कू यादव के खिलाफ पुलिस को रिपोर्ट करने की योजना बनाई थी. मगर वो ऐसा नहीं कर सका. इससे पहले ही अक्कू यादव ने उसकी हत्या कर दी थी. ये घटनाएं तो केवल बानगीभर हैं, अक्कू यादव ने ऐसी न जाने कितनी ही वारदातों को अंजाम दिया. आए दिन अक्कू की करतूतों में इजाफा हो रहा था जिसकी वजह से पूरे नागपुर में पुलिस जनता के निशाने पर आने लगी थी. लिहाजा, पुलिस ने उसके खिलाफ कार्रवाई करते हुए साल 2004 में उसे जिलाबदर करा दिया. अब नागपुर शहर में उसकी एंट्री बैन हो चुकी थी लेकिन वो फिर भी छिपकर शहर में ही रह रहा था और उसका काम भी जारी था. अक्कू की दबंगई को लेकर इलाके के मर्द भले ही डर से खामोश रहते हों लेकिन वहां की औरतों के बीच उसके गुनाहों को लेकर गुस्सा बढ़ता जा रहा था. फिर एक दिन उषा नारायण नाम की एक महिला ने भरत कालीचरण उर्फ अक्कू यादव और उसके गैंग के खिलाफ आवाज उठाई. उस महिला ने इलाके के लोगों को अक्कू गैंग के खिलाफ जागरूक करने की कोशिश की जिसका असर भी हुआ. लोग उषा नारायण की बातों से प्रभावित हुए और अपने दिल से डर निकालकर उन सबने गैंगस्टर अक्कू यादव के खिलाफ मसाल उठा ली. लोगों का गुस्सा और भीड़ का आक्रोश देखकर अक्कू यादव वहां से अपने गिरोह के साथ भाग निकला. भीड़ ने उसके घर को आग लगा दी. अक्कू यादव ये सब देखकर फौरन इलाकाई पुलिस की तरफ मदद मांगने के लिए भागा. जब उसे कोई और रास्ता नहीं सूझा तो उसने खुद को पुलिस के हवाले कर दिया ताकि वो भीड़ और इलाके के लोगों से बच सके. वो 13 अगस्त का दिन था. अक्कू यादव अब पुलिस की अभिरक्षा में था. वो अदालत से स्थायी सुरक्षा की मांग करना चाहता था. लिहाजा, उस दिन उसकी अदालत में पेशी होनी थी. पुलिस भारी सुरक्षा के बीच उसे नागपुर की जिला अदालत में लेकर आ रही थी. कोर्ट नंबर 7 में आरोपी की पेशी होनी थी. यह बात पूरे शहर की महिलाओं को पता थी. इसलिए उस दिन कोर्ट परिसर महिलाओं से खचाखच भरा हुआ था. पुलिस भारी भीड़ के बीच उस दरिंदे को लेकर अदालत में पहुंची. जैसे ही पुलिस अक्कू यादव को लेकर कोर्ट नंबर 7 में दाखिल हुई, तभी अचानक वहां मौजूद महिलाओं के एक समूह ने अक्कू यादव पर हमला बोल दिया. उसके चेहरे पर लाल मिर्च का पाउडर फेंका गया. उसके जिस्म पर महिलाओं ने चाकू और पत्थरों से वार किए. वो महिलाओं की भीड़ के बीच नजर भी नहीं आ रहा था. अदालत में ये मंजर देखकर जज साहब भी खौफजदा हो गए. इससे पहले कोई कुछ समझ पाता, किसी ने अक्कू का प्राइवेट पार्ट काटकर उसके जिस्म से अलग कर दिया. कुछ देर बाद अक्कू की आवाज आनी बंद हो गई थी. पुलिस ने अदालत को चारों तरफ से घेर रखा था. मौके पर करीब 400 महिलाएं मौजूद थीं. अदालत में बने विटनेस बॉक्स के पास एक आदमी खून से लहूलुहान हालत में पड़ा था. जिसकी सांसे थम चुकी थी और जिस्म ठंड़ा पड़ चुका था. खून से उसके सफेद बाल भी लाल हो चुके थे. अदालत में अक्कू का कत्ल हो चुका था. वहां मौजूद सभी महिलाओं ने जज से कहा कि उन सबने मिलकर वहशी दरिंदे अक्कू को मारा है और अब उन्हें गिरफ्तार कर लें. क्योंकि सभी महिलाओं ने हत्या की जिम्मेदारी ली थी तो पुलिस ने कुछ महिलाओं को मौका-ए-वारदात से गिरफ्तार कर लिया था. हालांकि कुछ दिन बाद ही सभी आरोपी महिलाओं को बरी कर दिया गया. लेकिन महाराष्ट्र सीआईडी ने अपनी जांच में कहा था कि अक्कू यादव की लिंचिंग की गई है, जिसे चार पुरुषों ने अंजाम दिया था. जिन महिलाओं ने इस हत्याकांड की जिम्मेदारी ली थी, वे सभी उन चार लोगों की रक्षा कर रही थीं. मगर वहां मौजूद महिलाओं ने पुलिस की इस बात को सिरे से नकार दिया था. आप सोच रहें होंगे कि इस बार हम अक्कू यादव की कहानी आप तक क्यों लेकर आए. तो हम आपको बता दें कि नेटफ्लिक्स की इंडियन प्रिडेटर सीरीज में तीसरा सीजन आने वाला है जिसका नाम है ‘मर्डर इन अ कोर्टरूम’. यह कहानी भरत कालीचरण उर्फ अक्कू यादव की जिंदगी पर ही आधारित है.
Edited By : Rahman











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