कानपुर के ज्योति हत्याकांड में पति उसकी प्रेमिका समेत आरोपितों को दोषी करार दिए जाने के बाद पिता बेटी के लिए इंसाफ लड़ाई के पल याद कर फफक पड़े।
यूपी कानपुर, क्राइम इंडिया संवाददाता। ज्योति हत्याकांड में आरोपितों को दोषी करार दिए जाने के बाद पिता शंकर लाल नागदेव काफी भावुक लगे। पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि भले ही यहां उनकी बेटी की हत्या हुई हो लेकिन, एक घटना के बाद वह कनपुरिया संस्कृति के मुरीद हो गए, जब सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर परिचय होने पर कुली ने सामान उठाने का पैसा लेने से मना कर दिया था। हालांकि उन्होंने समाज पर साथ न देने का आरोप भी लगाया। ज्योति के पिता शंकर लाल नागदेव ने बताया कि हत्याकांड के बाद शहर के लोगों में भारी आक्रोश था। लोग सड़क पर आकर विरोध दर्ज करा रहे थे। सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर हुई घटना को याद करके वह फफक कर रो पड़े। उन्होंने बताया कि एक दिन वह पेशी पर शहर आए थे। तब तक उन्हें सुरक्षा मिल चुकी थी। उनके साथ पुलिसकर्मी रहते थे। सेंट्रल स्टेशन पर ट्रेन रुकी तो सामान उठाने के लिए उन्होंने एक कुली सौ रुपये में तय किया। बीच में कुली ने किसी पुलिसकर्मी से उनका परिचय जान लिया कि वह ज्योति के पिता हैं। बाहर निकलने पर जब उन्होंने कुली को सौ रुपये देना चाहा तो उसने पैसा लेने से मना कर दिया। उसने उनसे माफी मांगी कि उसके शहर में उनकी बेटी की हत्या हो गई। लाख अनुरोध पर भी उसने पैसा नहीं लिया। शंकर लाल नागदेव ने बताया कि तब से वह कानपुर की संस्कृति के कर्जदार और मुरीद हो गए। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि आठ साल चली लंबी लड़ाई के दौरान समाज ने कभी उनका साथ नहीं दिया। स्थानीय होने के नाते उनका झुकाव पीयूष के परिवार की ओर ही रहा। जबकि पूरा शहर बेटी के लिए इंसाफ की मांग कर रहा था। पत्रकार वार्ता के दौरान ज्योति के पिता से जब उनके संघर्षों को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि फिलहाल सजा होने तक वह अधिक बयान नहीं देंगे लेकिन, आठ साल के दौरान तमाम बार ऐसा हुआ, जब वह परेशान हुए। शुरूआत में इटावा निवासी एक दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री की ओर से उन पर तमाम दबाव डलवाए गए। इटावा पुलिस जबलपुर उनके घर तक पहुंच गई थी। उन्हें झूठे मुकदमे में फंसाने की कोशिश की गई।
Edited By : Rahman











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