पश्चिम बंगाल, क्राइम इंडिया संवाददाता । गैर-भाजपा शासित राज्यों के राज्यपालों के कथित अलोकतांत्रिक व असंवैधानिक आचरण के खिलाफ वहां की सत्ताधारी दलों के आंदोलन में तृणमूल कांग्रेस इसमें शामिल नहीं होगी। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बंगाल के कार्यवाहक राज्यपाल ला गणेशन के साथ काफी अच्छे संबंध हैं। ममता ला गणेशन के आमंत्रण पर उनके बड़े भाई के 80वें जन्मदिन समारोह में शामिल होने पिछले दिनों चेन्नई भी गई थीं। यह बात जगजाहिर है कि ला गणेशन से पहले बंगाल के राज्यपाल रहे व वर्तमान में देश के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के साथ ममता के बेहद कटु संबंध रहे हैं। तृणमूल ने उन्हें सीधे तौर पर भाजपा का एजेंट तक करार दे दिया था। धनखड़ भी बंगाल में कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर हमेशा ममता सरकार पर सवाल उठाते रहते थे। धनखड़ के बाद बंगाल के कार्यवाहक राज्यपाल बने ला गणेशन के साथ ममता के अभी तक बेहद मधुर संबंध हैं। ममता ने उन्हें अपने घर पर होने वाली कालीपूजा में आमंत्रित किया था, जिसपर राज्यपाल ने उन्हें अपने बड़े भाई के जन्मदिन पर चेन्नई आने को न्योता दिया था। ममता ने चेन्नई दौरे में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री व द्रमुक नेता एमके स्टालिन से मुलाकात कर विभिन्न राजनीतिक विषयों पर चर्चा की लेकिन तमिलनाडु के राज्यपाल को हटाने की मांग पर समर्थन के अनुरोध से इन्कार कर दिया। तृणमूल के एक नेता ने नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर कहा कि द्रमुक के राजनीतिक फैसलों से तृणमूल का कोई संबंध नहीं है क्योंकि उसके साथ पार्टी का कोई गठबंधन नहीं है। पार्टी ने अगले लोकसभा चुनाव में भाजपा के खिलाफ अकेले लड़ने का फैसला किया है इसलिए द्रमुक की सारी बातों को मानकर चलने जैसी कोई बात नहीं है। तमिलनाडु की तरह केरल में वाममोर्चा वहां के राज्यपाल के आचरण को लेकर आवाज उठा रही है। माकपा के राष्ट्रीय महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा कि समान विचारधारा वाले सभी दलों को गैर-भाजपा शासित राज्यों के राज्यपालों के असंवैधानिक व अलोकतांत्रिक आचरण का एकजुट होकर प्रतिवाद करना चाहिए। वहां के राज्यपाल भाजपा के राजनीतिक स्वार्थ के लिए काम कर रहे हैं।
Edited By : Rahman











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