पश्चिम बंगाल, क्राइम इंडिया संवाददाता। केंद्र सरकार पर देश में हिंदी थोपने का आरोप लगाते हुए इसके खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश में जुटे तमिलनाडु के मुख्यमंत्री व द्रमुक नेता एमके स्टालिन को इस मुद्दे पर बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का भी साथ मिल गया है। सूत्रों के अनुसार ममता की हालिया चेन्नई यात्रा के दौरान हिंदी पर भी स्टालिन के साथ चर्चा हुई है। ममता ने इस दौरान साफ कहा कि अगर राज्यों से बातचीत किए बिना या संसद में चर्चा किए बिना हिंदी थोपने की कोशिश की गई तो इसका पुरजोर विरोध किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, ममता व स्टालिन ने इसे लेकर विपक्षी दलों के बीच आम सहमति बनाने का भी आह्वान किया ताकि केंद्र यदि कोई एकतरफा कदम उठाता है तो इसके खिलाफ मजबूती से आवाज बुलंद की जा सके। दरअसल, संसदीय समिति ने हाल में केंद्रीय शिक्षण संस्थानों में हिंदी को शिक्षा का माध्यम बनाने की सिफारिश की है, जिसके बाद तमिलनाडु के मुख्यमंत्री इसके खिलाफ मुखर हैं। स्टालिन केंद्र पर हिंदी थोपने का आरोप लगाते हुए इसके खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव लाने की भी तैयारी में हैं। इसमें केंद्र से सभी भाषाओं के साथ समान व्यवहार करने का अनुरोध किया जाएगा। वहां के सत्तारूढ़ दल द्रमुक हिंदी के खिलाफ राज्यव्यापी आंदोलन की भी घोषणा कर चुका है। तमिलनाडु के राजनीतिक दल पहले भी हिंदी का पुरजोर विरोध करते रहे हैं। वहीं, ममता की बात करें तो वह भी एक देश एक भाषा के तहत हिंदी को अनिवार्य बनाने के केंद्र के रूख का हमेशा विरोध करती रही हैं। कई प्रशासनिक और राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, दक्षिणी राज्यों में दो भाषाएं (अंग्रेजी और मातृभाषा) हैं और बंगाल जैसे पूर्वी राज्यों में तीन भाषाएं (अंग्रेजी, हिंदी और मातृभाषा) हैं। हिंदी के सवाल पर ममता का कहना है कि वह किसी भी भाषा- भाषी लोगों के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन पारंपरिक भाषाओं को दरकिनार करते हुए किसी एक भाषा को जबरदस्ती थोपने पर इसे स्वीकार नहीं किया जाएगा।
Edited By : Rahman











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