पश्चिम बंगाल, क्राइम इंडिया संवाददाता: जैसी उम्र, वैसी दर। चार से आठ साल की उम्र के बच्चे के लिए आठ से 10 लाख रुपये और आठ से 18 वर्ष की उम्र के मामले में पांच से छह लाख रुपये। त्वचा का रंग व बच्चे के गुणों को लेकर भी अलग-अलग दर। इसमें किसी तरह की सौदेबाजी नहीं चलती थी और कम से कम 40 फीसद रुपये अग्रिम तौर पर देने पड़ते थे। इसके बाद भी कई महीने तक इंतजार करना पड़ता था क्योंकि कतार में बहुत से लोग थे। नि:संतान लोगों को गैरकानूनी तरीके से बच्चे देने वाली स्वयंसेवी संस्था से जुड़े लोगों को गिरफ्तार करके कोलकाता के हरिदेवपुर थाने की पुलिस को यह बात पता चली है। पुलिस ने संस्था के विभिन्न ठिकानों पर छापामारी की है, जहां से यह अवैध धंधा चल रहा था। जांच में पता चला है कि सरकारी पोर्टल के जरिए जिस तरह से बच्चा गोद लेने के लिए आवेदन किया जाता है, ठीक उसी तरह से ही यहां भी आवेदन किया जा रहा था। एक नि:संतान दंपती ने पुलिस को बताया कि एक साल पहले उन्होंने बच्चे के लिए चार लाख रुपये दिए थे। बच्चा मिलने के बाद और छह लाख रुपये देने की बात थी। अब उन्हें बच्चा मिलेगा या नहीं, पता नहीं। पुलिस ने बताया कि इस तरह से बच्चा गोद लेना गैरकानूनी है।अधिकांश लोगों को इसकी जानकारी थी, फिर भी बच्चे की चाह में उन्होंने गलत रास्ता आजमाया क्योंकि कानूनी तरीके से बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया लंबी, जटिल और दीर्घकालिक है। इसे लेकर काफी सख्त नियम भी हैं।
Edited By : Rahman











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