Ghaziabad : इंदिरापुरम में पीपी ज्वेलर्स के शोरूम में 4.30 करोड़ का सोना पकड़ा गया

गाजियाबाद, क्राइम इंडिया संवाददाता सईद अनवर। इंदिरापुरम के वैभव खंड पीपी ज्वेलर्स (श्री गणेश ज्वेलर्स) के शोरूम पर बिना हालमार्क सोना बेचा जा रहा था। शनिवार शाम को भारतीय मानक ब्यूरो (बीआइएस) की टीम ने छापेमारी कर 30 लाख का बिना हालमार्क का सोना पकड़ा है। टीम को अंदेशा है कि यह मिलावटी सोना है। जिस वजह से इस पर हालमार्क नहीं लगाया गया। चार कराेड़ रुपये के सोने पर पुराना हालमार्क लगा था। इस सोने को सील कर सर्राफा को दे दिया है। वह इस सोने को बीआइएस की अनुमति के बिना नहीं बेच सकता है। यह शोरूम वैभव खंड के कृष्णा अपरा शापिंग कांप्लेक्स जी नौ व 10 में है। बीआइएस को यहां पर मिलावटी सोना बेचने की शिकायत मिली थी। बीआइएस के संयुक्त निदेशक विक्रांत, उप निदेशक दिव्यांशु यादव, सहायक निदेशक हरिओम मीणा, विशाल कुमार, हरीश मीणा इंदिरापुरम पुलिस को साथ लेकर दोपहर दो बजे शोरूम में पहुंचे। शोरूम में काफी ग्राहक थे। शाम सात बजे तक दौरान शोरूम में सोने की जांच पड़ताल की गई। 500 ग्राम के 34 आभूषण ऐसे पाए गए, जिन पर हालमार्क नहीं था। इनकी कीमत करीब 30 लाख रुपये हैं। इस सोने को टीम ने जब्त कर लिया। इसके अलावा सात किलो सोने के आभूषण पर पुराना हालमार्क लगा था। इसकी कीमत लगभग चार करोड़ रुपये हैं।पुराना होने के कारण इनका असली या निकली हालमार्क होने की पहचान नहीं हो सकी है। ज्वेलर से पुराने हालमार्क को दस्तावेज दिखाने के लिए कहा गया लेकिन वह कोई दस्तावेज नहीं दिखा सका। जिस वजह से इस सोने को सील कर सर्राफ को दे दिया। जब तक इस सोने पर हालमार्क को दस्तावेज नहीं मिलते तब तक इसे बेच नहीं जा सकता है। शोरूम को सील नहीं किया है। बीआइएस के अधिकारियों ने बताया कि ज्वेलर ने 2021 में हालमार्क का लाइसेंस लिया था। तभी से आभूषण बेच रहा था। कोर्ट का आदेश कराकर इस सोने की जांच कराई जाएगी। बिना हालमार्क का सोना मिलावटी माना जाता है। सर्राफ 16 या इससे कम कैरेट के सोने को 22 कैरेट का बताकर बेचते हैं। यह इंदिरापुरम का जाना-माना शोरूम है। लोग भरोसा कर इस शोरूम से आभूषण खरीदते हैं। शोरूम में प्रतिदिन लाखों रुपये का व्यापार होता है। यहां ग्राहकों की भीड़ लगी रहती है। ज्यादातर ग्राहकों को हालमार्क की जानकारी नहीं होती है। वह बस शोरूम पर भरोसा कर आभूषण खरीद रहे थे। कैरेट से मतलब सोने की शुद्धता से है। सोने को 0 से 24 कैरेट के बीच मापा जाता है। 24 कैरेट सोना 99.9 फीसदी शुद्ध होता है। वहीं, 22 कैरेट सोना 91 फीसदी शुद्ध होता है। हालांकि 22 कैरेट सोने में नौ प्रतिशत भाग दूसरे धातु का मिला होता है। 24 की बजाय 22 कैरेट का सोना ज्यादा टिकाऊ माना जाता है। 22 कैरेट सोना आभूषण बनाने के लिए होता है। 22 कम कैरेट का सोना ज्यादा मिलावटी होता है। इसकी कीमत भी कम होती है। इसमें बहुत कम मात्रा में अन्य धातुओं को मिलाया जाता है। 24 कैरेट सोना नरम होता है। 24 कैरेट सोने की डेंसिटी भी कम होती है।इससे ज्वेलरी नहीं बनाई जा सकती है। यह आसानी से टूट जाता है। ज्यादातर 24 कैरेट के सोने का प्रयोग निवेश के लिए किया जाता है। जबकि 23 कैरेट सोना 95.8 प्रतिशत तक शुद्ध माना जाता है। आम लोगों को होलमार्क का जानकारी नहीं होती है। प्रत्येक ज्वेलरी पर एचयूआइडी (हालमार्किंग यूनिक आइडेंटीफिकेशन ) नंबर होता है। यदि आप कान की दो बाली खरीद रहे हैं तो दोनों बाली पर अलग-अलग नंबर होता है। एप पर नंबर डालने पर असली  नकली हालमार्क का पता चल जाता है।

Edited By : Rahman

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