भागलपुर, क्राइम इंडिया संवाददाता। जमीन कारोबारी मुहम्मद इमरान उर्फ कल्लू मियां की कातिलाना हमले में मौत हो गई थी। कल्लू की हत्या से तिलमिलाए प्रतिद्वंद्वी गुट की तरफ से जवाबी घात की आशंका बलवती हो गई है। जिसे लेकर पुलिस मुल्लाचक, हुसैनपुर, शहबाजनगर में चौकसी बरत रही है। पुलिस मुख्यालय की विशेष शाखा ने भी भागलपुर पुलिस को सभी एहतियाती कदम उठाने को कहा है। बता दें कि दक्षिण खंड पर कब्जे की जंग में मो. साबिर को कोलकाता में शरण लिए कुख्यात टिंकू मियां का संरक्षण मिला तो मुहम्मद इमरान उर्फ कल्लू को टिंकू अंसारी का साथ मिला।टिंकू अंसारी के शूटर कल्लू के साथ साये की तरह रहा करते थे। घात-प्रतिघात के दौर में 22 फरवरी को प्रतिद्वंद्वी गुट ने कल्लू को निशाना बना डाला। इनायतुल्ला अंसारी से जुड़े साबिर की मुल्लाचक में बादशाहत थी। कन्ना किताब का धंधा साबिर के इर्दगिर्द ही घूमता रहा है। मोगलपुरा में टिंकू मियां के लोग धंधे को संभाल रह रहे थे। इलाके में रहमत कुरैशी, पासा बादशाह, सद्दाम, अफसार, टीपू, पतलिंगा, गरीबा, छोटू सरीखे कई शातिर चौथ वसूली और मादक पदार्थ के काले धंधे में भी खौफ का विस्तार करने लगे थे। दक्षिण खंड में अंसारी गिरोह के दूसरे धड़े की कमान संभाल रहे अंसारी के भतीजे टिंकू अंसारी और उससे जुड़े शातिर वर्चस्व बनाने के लिए भरोसे के लोग खोजने लगे। इस दौरान इमरान उर्फ कल्लू का साथ मिला था। यहीं से वर्चस्व की नई जंग छिड़ गई। कल्लू के पिता की 30 साल पहले हत्या कर दी गई थी। उस हत्या में साबिर का नाम उछला था। कहा जाता है कि कल्लू ने टिंकू अंसारी गुट से नाता भी साबिर को पटखनी देने के लिए जोड़ा था। साबिर को रास्ते से हटाने के लिए टिंकू अंसारी गिरोह के शूटरों गाजी बाबा, बाबू कुल्हाड़ी समेत अन्य ने बड़ी पोस्ट ऑफिस के सामने दिनदहाड़े कई गोलियां बरसाई थी। तब साबिर के साथ चमरू मियां भी जा रहे थे। जानलेवा हमले में दोनों जख्मी हुए थे। उसके बाद शूटरों में एक गाजी बाबा की हत्या टिंकू मियां गिरोह के शूटरों ने नाथनगर में कर दी थी। हमलावरों को एक-एक कर ठिकाने लगा दिया गया। जो बचे वह फिर से ताकत जुटा दक्षिण खंड पर वर्चस्व की जंग में शामिल हो घात लगाने में जुटे रहे। इस बीच कल्लू को 21 अगस्त 2020 को पांच गोलियां मारी गई। उपचार के दौरान कल्लू बचा लिया गया। कल्लू उसके बाद से बचाव में हथियारबंद गुर्गों से घिरा रहता था। सने मुल्लाचक स्थित अपने ठिकाने में खुद को सुरक्षित कर लिया था। इस बीच छापेमारी में वह हथियार के साथ गिरफ्तार कर लिया गया।mजेल से निकलने के बाद वार्ड पार्षद चुनाव में साबिर को शिकस्त देने के लिए उसने मिंटू कुरैशी की पत्नी का साथ दिया। नतीजा साबिर की पत्नी शाहीन अंजूम हार गई। इस बीच साबिर को सदमा लगा। वह बीमार पड़ गया। वह कन्ना किताब के धंधे से नाता तोड़ उपचार के लिए बेंगलुरु चला गया। इधर, कल्लू की मुल्लाचक में हत्या कर दी गई। हालांकि, जरायम नगरी में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि साबिर ने बीमार होने का बहाना बनाकर कल्लू की हत्या की साजिश रची और खुद बेंगलुरु चला गया। केस में साबिर भी नामजद बनाया गया है। वहीं, इनायतुल्ला अंसारी और मुहम्मद सल्लन की हत्या को दशक बीत गए लेकिन गिरोह का वजूद जिंदा है। शहरी और मुफस्सिल इलाके में दोनों गिरोह से टूटे शातिर ही सिर उठा रहे हैं। इनकी करतूतों से इलाका रह-रहकर अशांत होता रहता है। एक दूसरे के खून के प्यासे बदमाशों को जब मौका मिला एक-दूसरे को निशाना बनाने में नहीं चूके। पुलिस ने गैंगवार की आशंका को देखते हुए इलाके में पुलिस की गश्त बढ़ा रखी है। पुलिस मुख्यालय की विशेष शाखा ने डीआइजी विवेकानंद और जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन को विधि-व्यवस्था बनाए रखने को लेकर सभी एहतियाती कदम उठाने को कहा है। डीआइजी के निर्देश पर एसएसपी आनंद कुमार ने सिटी डीएसपी अजय कुमार चौधरी के नेतृत्व में एक टीम ही गठित कर दी है, जो स्थिति पर नजर बनाए हुए है। वहीं, कहा जा रहा है कि कन्ना किताब के धंधे में दखल देने के कारण कल्लू निशाने पर था। बता दें कि कन्ना किताब गाय की गोबर की थैली से निकलने वाला चर्बीयुक्त कई परत वाला भाग है, जिसे सुखाने पर उसकी कई परतें किताब की तरह खुलती है। रेशमी नगर के जरायम पेशेवरों ने कन्ना किताब का नाम दे दिया। कन्ना किताब की चीन, लाओस, वियतनाम, मलेशिया, सिंगापुर आदि जगहों पर इसकी मांग है। जिसे चोरी-छिपे कोलकाता भेजा जाता और वहां बड़े कारोबारी विदेश भेजते हैं। कन्ना किताब को यौन शक्ति बढ़ाने में चीन, लाओस, वियतनाम आदि देशों में इस्तेमाल किया जाता है। भागलपुर में टिंकू मियां गिरोह के लोग मोगलपुर, हुसैनाबाद, मुल्लाचक, हुसैनपुर, शहबाजनगर आदि जगहों से कन्ना किताब औने-पौने दाम में लेकर उसे कोलकाता में मंहगे दामों में बेचते हैं। कहा जाता है कि अंसारी गिरोह के दूसरे धड़े की कमान संभालने वाले टिंकू अंसारी से जुड़े दक्षिण खंड में सक्रिय बदमाशों ने भी कन्ना किताब के धंधे में दखल देना शुरू कर रखा था। कल्लू उन्हें संरक्षण देने के कारण प्रतिद्वंद्वियों के निशाने पर था।
Edited by : Raees Khan











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