पश्चिम बंगाल : 4 साल की मासूम को 5 साल बाद मिला इंसाफ, हैवान शिक्षक की खौफनाक दास्तां आपको रूह कंप जाएगा

पश्चिम बंगाल, क्राइम इंडिया संवाददाता सईद अनवर : गुरुवार 30 मार्च 2023 को अलीपुर की पॉक्सो अदालत ने दक्षिण कोलकाता के एक प्रतिष्ठित स्कूल के दो शिक्षकों को सजा सुनाई है। इस मामले में 5 साल बाद जाकर पीड़िता को इंसाफ मिला है। मामला नवंबर 2017 का है जहां चार साल की मासूम से शिक्षकों ने रेप की घटना को अंजाम दिया था। इस केस में सीसीटीवी फुटेज के साथ ही चार डॉक्टरों के बयान दर्ज किए गए थे। दोनों आरोपी अभिषेक रॉय और एमडी मोफिजुल उर्फ मोहम्मद मोफिजुद्दीन को आईपीसी की धारा 376डी (सामूहिक बलात्कार) और पॉक्सो की धारा 6 (गंभीर भेदक यौन हमला) के तहत दोषी पाया गया। इन कानूनी धाराओं के तहत अधिकतम सजा आजीवन कारावास है। वहीं पॉक्सो एक्ट-6 के तहत कम से कम 20 साल की सजा है। मासूम से रेप के मामले में शिक्षकों की सजा की समय सीमा शुक्रवार को तय होने की संभावना है। बच्ची के पिता ने कहा कि, ‘पिछले पांच साल की लंबी लड़ाई को उन्होंने उन सभी माता-पिता की ओर से लड़ा जो अपने बच्चों को स्कूल भेजते हैं। उन्होंने कहा, ‘मैंने अपनी बच्ची को दूसरे स्कूल में दाखिला कराया और वह अब तीसरी कक्षा में पढ़ती है। लेकिन आज भी वह असहज सवाल करती है। स्कूल में रेप की शिकार हुई चार साल की बच्ची के पिता ने कहा, ‘घटना के कुछ हफ्तों बाद मैंने अपनी मां को खो दिया। क्योंकि वह इस सदमे को सहन नहीं कर सकी। बच्ची के पिता ने कहा कि मैंने अपनी नौकरी भी खो दी जिसके बाद कारोबार शुरू किया। लेकिन मैंने कभी हार नहीं मानी और हर सुनवाई में शामिल हुआ। आज न केवल मेरी बेटी को, बल्कि उन सभी लोगों को न्याय मिला है, जिन्हें सत्ता के पदों पर लोगों ने प्रताड़ित किया है। मैं पुलिस के सहयोग और सच्चाई का पता लगाने के लिए उनका शुक्रगुजार हूं।’ पॉक्सो मामलों की विशेष लोक अभियोजक माधवी घोष ने कहा कि, ‘उन्होंने अभियोजन पक्ष के 21 गवाह पेश किए। जिसमें बच्ची की बंद कमरे में गवाही प्राथमिक साक्ष्य है। माधवी घोष ने कहा कि बचाव पक्ष चिकित्सा के आधार पर चुनाव लड़ना चाहता था लेकिन बच्चे की जांच करने वाले चार डॉक्टरों – पारिवारिक चिकित्सक और मनोरोग विभाग के तीन एसएसकेएम डॉक्टरों ने हमें केस को मजबूत बनाने में मदद की। बच्ची के साथ पढ़ने वाली एक और सहपाठी की मां ने भी इस मामले में मदद की। क्योंकि उसकी बच्ची के साथ भी कुछ ऐसा हुआ था। जिसके बाद अदालत ने हमारे सबूतों पर भरोसा जताया। बच्ची से रेप के मामले में उच्च न्यायालय ने आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी। जिसके साथ ही आरोपी पूरे मुकदमे के दौरान हिरासत में रहे। मुख्य लोक अभियोजक शिबनाथ अधिकारी ने कहा, ‘हम संतुष्ट महसूस करते हैं कि हम बच्ची को न्याय दिला सके। 30 नवंबर, 2017 को हुई इस घटना के बाद पूरे शहर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुआ था। पुलिस ने इस मामले में जिन लोगों से पूछताछ की उनमें स्कूल के प्रधानाचार्य, अन्य शिक्षक और गैर-शिक्षण कर्मचारी शामिल थे। लड़की के नाम का खुलासा करने के लिए उसके खिलाफ मामला दर्ज होने के बाद प्रिंसिपल को नौकरी से निकाल दिया गया। दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी के 88 दिन बाद पॉक्सो कोर्ट में 287 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की गई। बचाव पक्ष के वकीलों ने दावा किया कि वे ऊपरी अदालत में अपील करने का फैसला करने से पहले अंतिम फैसले और कितनी सजा मिलती है इसका इंतजार करेंगे।

Edited by : Raees Khan

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